February 20, 2026

रामा गैसेस और दूसरी फ र्म के पास अनुभव ही नहीं, टेंडर फि र बुलाने के अलावा अब कोई चारा नहीं, असल दोषी अब भी शिकंजे से बाहर

क्रय समिति ने ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी को दोषी माना, प्रबंधन पर अब भी लटक रही तलावार, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

पायनियर संवाददाता-राजनांदगांव

भारत रत्न स्वण् अटल बिहारी बाजपेयी स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबंद्ध चिकित्सालय की क्रय समिति की बैठक में शनिवार को ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी मेसर्स रामा एजेंसी का टेंडर निरस्त करने की तैयारी कर ली है। इस कार्रवाई के दिखावे के बावजूद मेसर्स रामा गैसेस के संचालक को कोई फर्क पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। इसका कारण है कि उक्त एजेंसी के संचालक ने ही दो अलग . अलग निविदाएं भरी थी। अगरए मौजूदा टेंडर निरस्त भी किया जाता है तो दूसरी निविदा के सहारे वह काम कर सकता है। हालांकि दूसरी निविदा पर टेंडर देना भी क्रय समिति को कई अन्य कारणों के चलते विवादों में ला सकता है। बताया जा रहा है कि दूसरे क्रमांक पर रही फ र्म के पास ऑक्सीजन सप्लाई का कोई अनुभव ही नहीं है।
शनिवार की दोपहर 12 बजे हुई क्रय समिति की बैठक में मेसर्स रामा गैसेस के संचालक ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद समिति ने पाया कि जिस मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई की जानी चाहिए थी वह नहीं की गई। इस बिनाह पर मौजूदा टेंडर निरस्त कर एलटू यानि कि जिसकी निविदा दूसरे नंबर पर थी उसे यह काम सौंप दिया जाएगा। टेंडर का डिफरेंस अमाऊंट दूसरी सप्लाई एजेंसी को दिया जाएगा। वहीं मेसर्स रामा गैसेस द्वारा जमा की गई रकम जब्त कर ली जाएगी।
बताया जा रहा है कि मेसर्स रामा गैसेस के नाम से टेंडर लेने वाले संचालक ने ही एक अन्य फ र्म के नाम से ही दूसरा टेंडर भी डाला था। ऐसे में मौजूदा टेंडर निरस्त होने के बाद भी वह ऑक्सीजन की सप्लाई करता रहेगा। हालांकि इसका फैसला सोमवार को होगा। इसके अलावा दूसरे नंबर पर रहे टेंडर का संचालक अगर समिति की नियम और शर्तों को पूरा नहीं पाता है तो ऑक्सीजन सप्लाई के लिए फि र से टेंडर बुलाया जाएगा।

दूसरी फ र्म गैर अनुभवी
बताया जा रहा है कि मेसर्स रामा गैसेस के संचालक ने ही रामा गैसेस के अलावा एक अन्य फ र्म के सहारे भी निविदा में हिस्सा लिया था। क्रय समिति ने इन्हीं दोनों निविदाओं को संपूर्ण और योग्य मानते हुए मेसर्स रामा गैसेस को ऑक्सीजन सप्लाई का काम सौंप दिया था। वहीं एक अन्य निविदा को दूसरे क्रमांक पर रखा गया था। अब क्रय समिति का पक्ष है कि वह दूसरे क्रमांक पर रही फ र्म को अपनी शर्तों के साथ काम सौंपेंगे। लेकिन यहां एक बड़ा पेंच है जिसके चलते टेंडर निरस्त होने और दोबारा निविदाएं मंगाने की पूरी.पूरी संभावनाएं हैं। दरअसल जानकारी के अनुसार ऑक्सीजन सप्लाई की इस निविदा में जो दूसरी फर्म शामिल है उसके पास ऑक्सीजन सलाई का अब तक कोई अनुभव ही नहीं है। गैर अनुभवी फ र्म को पांच सौ बिस्तरों के अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई का काम सौंपना काफ ी जोखिम भरा साबित हो सकता है। इस पैमाने को देखते हुए संभव नहीं है कि उस एजेंसी को काम सौंपा जा सके। बावजूद इसके क्रय समिति अगर यह निर्णय लेती है तो इसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो सकता है।

प्रबंधन का बच निकलना मुश्किल
इस बैठक के दौरान बीते 15 नवंबर को हुई खैरागढ़ निवासी 55 वर्षीय कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत के मामले में ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी को घोर लापरवाही का दोषी ठहराया गया है। यह बैठक शनिवार को दोपहर 12 बजे शुरु हुई जिसमें सप्लाई एजेंसी के संचालक ने अपना पक्ष रखा। दरअसलए ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी पर आरोप है कि उसने घटना के दिन और इससे पहले पर्याप्त ऑक्सीजन की सप्लाई कोविड अस्पताल में नहीं की। ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी मेसर्स रामा गैसेस के लपेटे में आने के बावजूद अब भी मेडिकल अस्पताल प्रबंधन के बच निकलने की संभावनाएं कम हैं। पहले ही स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव मौत के लिए प्रबंधन को जिम्मेदार बताते हुए कड़ी जांच और कार्रवाई की बात कह चुके हैं।
प्रबंधन पर भी कई तरह के आरोप है। 15 नवंबर को हुई मौत के लिए अव्यवस्थित और लापरवाह प्रबंधन को भी दोषी ठहराया जा रहा है जिसकी कमान अधीक्षक प्रदीप बेक के हाथ में है। इसके अलावा ड्यूटी डॉक्टर और मेडिकल स्टॉफ की भूमिका को लेकर भी कई तरह के सवाल है जिसे लेकर स्वास्थ्य महकमा जांच कर रहा है। इसके अलावा कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति भी इस मामले की जांच कर रही है। इन जांच के निष्कर्ष के साथ ही मेडिकल कॉलेज में बड़े फेरबदल की संभावनाएं हैं।

विवादों कें केंद्र में अधीक्षक
संयुक्त संचालक व अधीक्षक प्रदीप बेक इस पूरे मामले को लेकर विवादों के केंद्र में हैं। एक अहम पक्ष है कि दीवाली के मौके पर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमराई हुई रही। यहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहे और न ही चिकित्सकीय व्यवस्था का प्रबंधन ही सही रहा। इन सभी खामियों के लिए अधीक्षक बेक जिम्?मेदार हैं। मेडिकल कॉलेज की मॉनिटरिंग सहीं न होने के चलते एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस गंभीर मसले को लेकर उन पर तलवार लटक रही है। संभव है कि जल्द ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो।

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