May 10, 2026

बंगलों के बाहर मिरर और इसके लिए खंभे खड़े करने के बाद भी नहीं हुआ सर्वे

वीआईपी जोन में तस्वीर दिखाने तक सिमटकर रह गया रोड मिरर का प्लान

पायनियर संवाददाता-रायपुर

शहर में हादसों की रोकथाम के लिए स्मार्ट सिटी का रोड मिरर प्रोजेक्ट सवालों में घिर गया है। खासकर से तब, जब मिरर का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ वीआईपी बंगलों के बाहर ही होने के बाद बाकी जगहों की समस्या की अनदेखी करने की स्थिति स्मार्ट सिटी की दूरदर्शी योजनाओं को सवालों में खड़ा करने वाली है।
दरअसल रोड मिरर बिना किसी ट्रैफिक पुलिस के सर्वे के ही बंगलों के बाहर लगा दिए गए हैं। ऐसी जगहों को भी अंधा मोड़ बताकर रोड मिरर का इस्तेमाल किया गया है, जहां पर हादसों का ग्राफ शून्य या फिर 5 प्रतिशत तक है। कभी-कभार ही बंगले या फिर हाई सिक्योरिटी जोन में हादसे होते हैं। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों का कहना है, डेमो के तौर पर ही फिलहाल रोड मिरर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी उपयोगिता देखने के बाद आगे शहर के बाकी हिस्सों के लिए प्लान बनेगा। बंगलों के बाहर मिरर और इसके लिए खंभे खड़े करने के बाद फिलहाल कहीं भी सर्वे का काम नहीं हुआ है। जहां तक ट्रैफिक पुलिस का कहना है, उनसे भी अभी तक स्मार्ट सिटी की तरफ से संपर्क नहीं किया गया है।
शहर में डेंजर जोन से लेकर अंधे मोड़ की समस्या तक ट्रैफिक विभाग की ओर से कई बार सर्वे किया गया है। एक्सपर्ट का कहना है, ट्रैफिक पुलिस के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर रोड मिरर का इस्तेमाल और बेहतर तरीके से हो सकता है। ट्रैफिक डीएसपी सतीश सिंह के अनुसार उपयोगी ट्रैफिक मिरर के सर्वे के लिए फिलहाल उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है। मेट्रो सिटी में इस तरह का प्रयोग सफल रहा है। रायपुर में भी इसका फायदा मिलेगा। 100 ठिकानों पर सुरक्षा जरूरी शहर और आउटर के हिस्सों में लगभग 100 जगहें ऐसी हैं, जहां पर मिरर की जरूरत है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने वीआईपी जोन के साथ अन्य जगहों पर लगभग 30 मिरर लगवाए हैं। अंधे मोड़ पर गोलाकार तथा सामने वाली सड़क के ट्रैफिक को अच्छी तरह दिखाने वाले ट्रैफिक मिरर अंधे मोड़ या खतरनाक जगहों पर उपयोगी है। एक्सपर्ट के मुताबिक ये मिरर किसी भी ओर के वाहन चालक को दूसरी सड़क का दृश्य दिखाकर एलर्ट कर देते हैं, इसलिए हादसे कम होते हैं। शुरुआत में ही आठ लाख खर्च रोड मिरर के डेमो के नाम पर ही स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से आठ लाख रुपए खर्च किए गए हैं। सिविल लाइंस, शंकरनगर और बैरनबाजार जाने के मार्ग पर रोड मिरर लगाया गया है। अंधा मोड़ तय कर दोनों छोर से यह मिरर लगाया गया है। ट्रैफिक पुलिस के रिपोर्ट कार्ड में ये जगह डेंजर जोन से बिल्कुल बाहर है।
यहां से सड़क दुर्घटना की खबरें कभी-कभार ही पुलिस तक पहुंचती हैं। अंडरपास के आसपास बढ़ रहा खतरा रिंगरोड 1 में बनाए गए तीन बड़े ब्रिज के नीचे अंडरपास के आसपास खतरा बढ़ रहा है।
यहां अंदर से निकलने वाली गाडिय़ां और सर्विस रोड पर चलने वाले वाहनों के बीच टकराव के हालात बनते हैं। अंडरपास से टर्न के लिए रांग ड्राइविंग की तस्वीरें भी आम रहती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक असल में इस तरह के अंडरपास वाले हिस्सों में मिरर की जरूरत पहले है।

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