पायनियर संवाददाता-राजनांदगांव
धान खरीदी केंद्र पटेवा में शहीद की विधवा से रिश्वत मांगने के आरोपियों पर कलेक्टर के आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है। देर शाम कलेक्टर टीके वर्मा ने पायनियर को बताया कि धान खरीदी केंद्र पटेवा के मामले में उन्होंने जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद कार्रवाई के निर्देश केंद्रीय सहकारी बैंक के सीईओ सुनील वर्मा को दिए हैं। गौरतलब है कि कलेक्टर ने शुक्रवार को ही साफ कर दिया था कि शहीद की विधवा से रिश्वत मांगने जैसे संगीन मामले में दोषियों को बख्?शा नहीं जाएगा। कलेक्टर के आदेश के इतर केंद्रीय सहकारी बैंक के सीईओ सुनील वर्मा की ओर से कार्रवाई के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया गया।
गुरुवार को पटेवा खरीदी केंद्र में शहीद जवान प्रकाश वर्मा की विधवा से अभद्रता और धान में नमी बताकर लेबर ठेकेदार अंगद साहू ने समिति प्रबंधक के नाम से पांच हजार रुपये की मांग कर दी। इसका ऑडियो – वीडियो क्लिपिंग समेत शहीद जवान की विधवा की शिकायत पर तहसीलदार ने जांच की है। लगाये गए आरोपों की पुष्टि भी हो चुकी है। इस मामले में जांच अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन भी सौंपा जा चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में जल्द कार्यवाही का दावा भी किया था। इसके बाद भी अब तक फड़ प्रभारी और ठेकेदार पर किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं होने से किसानों में लगातार आक्रोश फैल रहा है।
इसी तरह की हरकतों के चलते घुमका सोसायटी में गिधवा के एक किसान करण साहू के धान को तौलाई के बदले पांच सौ रुपये की मांग करने और पैसा नहीं दे पाने से मंगलवार को सदमे में मौत का मामला अभी प्रशासनिक लापरवाही के चक्कर में उलझा हुआ है। पांच दिन बीत जाने के बाद भी जांच का निष्कर्ष नहीं निकला है। जबकि बुधवार को एसडीएम मुकेश रावटे और तहसीलदार रमेश मौर्य ने जांच की थी जहां आसपास मौजूद अन्य किसानों तथा परिजनों ने फड़ के लेबर ठेकेदार पर रुपये मांगने के आरोप की पुष्टि भी की थी। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए सरकार लाख दावे करे परन्तु जमीनी हकीकत देखा जाये तो पूरे देश को भोजन देने वाले अन्नदाताओं की दुर्दशा इन दिनों पूरे इलाके में आसानी से देखी जा सकती है। घुमका, भैंसातरा, पटेवा, मुरमून्दा केन्द्रों में आये दिन किसानों को समिति के कर्मचारियों से लेकर तौल करने वाले लेबर और ठेकेदार तक धान खरीदने के नाम पर धान की क्वालिटी के बहाने रिजेक्ट करने का डर दिखा अवैध उगाही में लगे हुए हैं।
झोलाझाप डॉक्टर से कराई स्वाभाविक मौत की पुष्टि
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों की जांच प्रक्रिया और लेटलतीफी को लेकर कई तरह के सवालों का उठना इसलिए भी स्वाभाविक है कि गिधवा के किसान की मौत के मामले में हो रहे विरोध को विपक्षी पार्टियों का द्वेषपूर्ण रवैया बताया जा रहा है। दूसरी ओर बीमारी के चलते किसान की मौत की पुष्टि के लिए जिस डॉक्टर को मौके पर बुलाया गया था ग्रामीण उसे पुराना कांग्रेसी और झोलझाप डॉक्टर बता रहे है। बताया जाता है कि उक्त झोलाझाप डॉक्टर को खैरागढ़ एसडीओपी जीसी पति खुद धान खरीदी केंद्र घुमका में सैकड़ों किसानों और प्रशासन के आला अधिकारियों के समक्ष लेकर आए थे। उन्होंने डॉक्टर को एक्सपर्ट चिकित्सक बताते हुए किसान की बीमारी से स्वाभाविक मौत साबित करने की कोशिश पोस्टमार्टम से पहले ही की थी।
जांच की दिशा बदल रही
घुमका और पटेवा के धान खरीदी के एवज में पैसे मांगने के मामले में जांच अधिकारियों द्वारा यह भी तर्क दिया जा रहा है कि पैसे का लेनदेन नहीं हुआ है, केवल मांग की गई है। इस तरह से जांच की दिशा बदलने की आशंकाओं के चलते पूरी जांच प्रक्रिया को क्षेत्र के किसान औपचारिकता मात्र मानकर चल रहे हैं। जबकि अब मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के तमाम जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की भी गिधवा के किसान की मौत और शहीद जवान की विधवा से रिश्वतखोरी के मामले में निष्क्रियता समझ से परे है।
कोचियों का धान खप रहा
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के मामले में घुमका समेत भैंसातरा, पटेवा और मुरमून्दा में काफी गड़बडिय़ों की शिकायत शुरू से बताया जा रहा है। यहां घुमका के बाद पटेवा समिति बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतों के बीच 1 दिसम्बर से अब तक खरीदे गए धान के सभी लाट की जांच से बड़ा खुलासा होने का अंदेशा इसलिए जताया जा रहा है कि आये दिन ग्रेडिंग के नाम पर लेनदेन कर कोचियों के खराब धान की खरीदी की शिकायत मिल रही है। इसके चलते स्टेक की गई धान के लॉट की क्वालिटी जांच करने पर फड़ प्रभारी द्वारा कोचियों से खरीदे गए घटिया और अमानक बदरायुक्त धान का बड़ा मामला खुल सकता है।
टोकन के लिए हजारों की रिश्वत
पटेवा खरीदी केंद्र में टोकन पर्ची देने के नाम पर जमकर वसूली का आरोप लगाते हुए तहसीलदार से गांव के किसान देवेंद्र साहू, ईश्वरी धनकर, अलख राम पाल, टूमन लाल गडरिया, लीलाराम और नूतन लाल ने शिकायत कर जांच की मांग की है। किसानों ने शिकायत कर कहा है कि सिर्फ टोकन देने के लिए फड़ प्रभारी द्वारा हजारों रुपये की मांग की गई और पहले से किसान किताब जमा कर चुके किसानों के बदले पैसा लेकर बाद में आये कई कोचियों को किसानों के आड़ में टोकन दिया गया है। विरोध करने पर किसानों का धान रिजेक्ट करने की तहसीलदार के सामने ही फड़ प्रभारी ने धमकी भी दी थी। इन सबके बाद भी आखिर प्रशासन की चुप्पी कहीं आनेवाले समय में और किसानों के लिये जानलेवा हो सकता है।
धीमा उठाव, ट्रांसपोर्टर के टेंडर में हुई देरी
जिले के धान खरीदी केंद्रों से धान का धीमे उठाव चिंता का सबब बन गया है। हालांकि मार्कफेड की मानें तो जल्द ही उठाव में तेजी जाएगी। शुक्रवार तक की स्थिति में जिले के उपार्जन केंद्रों में 15 लाख क्विंटल से अधिक धान जमा होने की जानकारी थी। प्रतिदिन 2 से 2.5 लाख क्विंटल धान की खरीद रोजाना हो रही है। सोमवार तक खरीदे गए धान का आंकड़ा 20 लाख क्विंटल से ज्यादा हो जाएगा। वहीं शुक्रवार तक मिलरों द्वारा 9 हजार क्विंटल का ही उठाव संभव हो सका था। ऐसे में अगर मंगलवार से धान के परिवहन में तेजी आती भी है तो केंद्रों से धान उठाने में काफी वक्त लग सकता है। धान परिवहन के संबंध में जिला विपणन अधिकारी सौरभ भारद्वाज ने ‘पायनियरÓ को बताया कि ट्रांसपोर्टरों का टेंडर पास होकर नहीं है, फिलहाल मिलरों द्वारा ही उठाव किया जा रहा है। सोमवार तक ट्रांसपोर्टर का टेंडर भी आ जाएगा जिसके बाद उपार्जन केंद्रों से धान के उठाव में तेजी आएगी। अभी हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बारदाने उपलब्ध हैं। धान खरीदी में कोई समस्या नहीं आएगी।

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