बारदाना संकट के बीच बाजार ने दी बड़ी राहत
पायनियर संवाददाता-भाटापारा
जेब में जितना पैसा, उतने में ही बारदाना। यह अघोषित संकल्प किसानों को अब भारी राहत पहुंचा रहा है। धान बेचने के पहले बारदाना खरीदने पहुंच रहे किसानों के पास अब 13 रुपए से लेकर 70 रुपए तक की कीमत वाले नए और पुराने बारदाने के बहुतेरे विकल्प बाजार ने रख दिए हैं।
बारदाना को लेकर प्रदेश भर में फैल चुकी अव्यवस्था को व्यवस्थित करने के प्रयास में बारदाना बाजार अब पहला कदम उठा चुका है। इसके बाद 13 रुपए से लेकर 70 रुपए तक के नए और पुराने दोनों किस्म के बैग की उपलब्धता बाजार में दिखाई दे रही है। बाजार की यह पहल राहत पहुंचाती नजर आ रही है। कृषि उपज मंडी हो या उपार्जन केंद्र, हर जगह पहली परेशानी बारदानों की खरीदी पर होने वाले खर्च के असर के रूप में दिखाई दे रहा है। ऐसे में बाजार अब पूरी तरह किसानों के साथ है और जितना पैसा हाथ में, उतने में बारदाना दे रहा है।
13 से 70 रुपए तक में
बारदाना खरीदने पहुंच रहे किसानों के पास कम से कम 13 रुपए और अधिकतम 70 रुपए तक की कीमत वाले पुराने और नए बैग का विकल्प सामने है। नया जूट बैग खरीदना है तो लगेंगे 70 रुपए। मंडी या उपार्जन केंद्रों में उपज बेचनी है तो 24 या 27 रुपए वाले जूट बैग हैं। प्लास्टिक बैग में 13 रुपए से लेकर 17 रुपए तक के नए और पुराने बैग सामने हैं। याने अब हाथ में जितना पैसा उतने में उपलब्ध है बाजार।
पहली बार ऐसे बारदाने
चौतरफा अव्यवस्था के बीच बाजार में पहली बार मोटे अनाज के अलावा आटा, सूजी, मैदा, शक्कर और पशु आहार के बारदाने बिक रहे हैं। इसके अलावा उर्वरक के प्लास्टिक बैग बेचे जा रहे हैं। इसमें भी कीमत कम और ज्यादा दोनों तरह के बैग है। राहत पहुंचाने के प्रयासों के बाद अब किसान, बाजार से खाली हाथ नहीं लौट रहा है। इसके अलावा मरम्मत किए गए बैग भी अपनी पहुंच बाजार में बनाते नजर आ रहे हैं।
इसलिए बारदाना संकट
देश में पटसन की व्यावसायिक खेती केवल पश्चिम बंगाल में ही होती है। अतिवृष्टि के बाद फसल को पहुंचे व्यापक नुकसान से जूट मिलों की मांग पूरी नहीं की जा सकी। इसलिए बारदाना बाजार पूरी तरह संकट में आ चुका है। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी में जूट बैग की प्राथमिकता और मांग के बीच छत्तीसगढ़ को 3 लाख गठान की जरूरत थी पर उपलब्ध हुए मात्र 1 लाख 52 हजार गठान। 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के लक्ष्य को जूट बैग की सीमित उपलब्धता में गहरा झटका दिया। विपरीत परिस्थितियों के बाद अब शेष 1 लाख 95 हज़ार गठान बारदाना की मांग का बेतरह दबाव पूरी तरह बाजार और किसान पर पड़ रहा है।
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