पायनियर संवाददाता . भाटापारा
रायपुर-बिलासपुर की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों पर पैसों के बाद अब समय की मार लगने लगी है। आर्थिक नुकसान तो किसी तरह सहा जा रहा है लेकिन समय की जो मार रेलवे ने लगाई है वह केवल पीड़ा की दे रही है। खासकर लिंक और साउथ बिहार एक्सप्रेस के यात्रियों पर यह मार सबसे ज्यादा पड़ रही है। रेल सुविधाएं बढ़ाने का ढिंढोरा पीटने वाला रेल मंत्रालय कोरोना संक्रमण के दौर में जिस तरह आपदा को अवसर के रूप में भुना रहा है उससे केवल निराशा ही दिख रही है। सामान्य टिकट, सामान्य यात्री ट्रेन और मासिक टिकट की सुविधा बंद करके आरक्षण पर ही चुनिंदा रेल गाडयि़ां चलाई जा रही हैं उसने सबसे ज्यादा नुकसान उस वर्ग के रेल यात्रियों को पहुंचाया है जो ऐसी ट्रेनों के सहारे रोजी-रोटी की व्यवस्था करते थे। अब यह वर्ग सड़क पर आ चुका है। उच्च और मध्यम वर्ग के यात्री भी ऐसी ही असुविधा से पीड़ित हो चुके हैं। ताजा मामला समय परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। जिन ट्रेनों के समय में परिवर्तन हुआ है उसे मंत्रालय आंशिक परिवर्तन का नाम दे रहा है उनमें बिलासपुर की ओर जाने वाली लिंक और साउथ बिहार एक्सप्रेस जैसी दो ट्रेन मुख्य हैं। इनके समय को 43 मिनट से एक घंटा तक आगे-पीछे किया जा चुका है।
टिकट के बाद अब समय की मार- सामान्य टिकट और मासिक पास की सुविधा एकदम से लॉक कर देने के बाद जो मार पड़ी है उसे सहा तो जा रहा है लेकिन समय की जो मार लगाई है वह असहनीय पीड़ा देने लगी है। लिंक और साउथ बिहार एक्सप्रेस ये दो ऐसी ट्रेन है जिनको बिलासपुर की ओर जाने वाला यात्री पहली प्राथमिकता देता है। कार्यालय या व्यवसाय के सिलसिले में जाने वाले यात्रियों को लिंक एक्सप्रेस में यात्रा करने के लिए 43 मिनट का विलंब सहना पड़ रहा है तो साउथ बिहार के यात्रियों को 32 मिनट पहले पहुंचना पड़ रहा है।
इनकी भी बढ़ी परेशानी- अब आएं रायपुर की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनों की ओर। हावड़ा-मुंबई- हावड़ा मेल रायपुर जाने वाले यात्रियों की पहली पसंद रही है। इसके समय में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है लेकिन अंबिकापुर- दुर्ग एक्सप्रेस अब 40 मिनट बाद आने लगी है। सुबह 6 बजकर 20 पर आने वाली यह ट्रेन अब 7 बजकर 32 मिनट पर आ रही है। समय पर नहीं चलने वाली यह ट्रेन सारनाथ एक्सप्रेस के बाद दूसरी ऐसी ट्रेन है जो विलंब से चलने का अपना रिकॉर्ड बराबर बनाए रखे हुए है। याने आरक्षण पर ही यात्रा के अनुमति के बाद अब समय की मार इस ट्रेन के यात्री भी सहने के लिए मजबूर है। शेष ट्रेनों के समय में आंशिक फेर बदल किया गया है लेकिन वह भी तकलीफ ही दे रही है।
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