151 संकुलों में हुई है फर्नीचर की सप्लाई, प्रत्येक के लिए मिली थी 80 हजार की ग्रांट
पायनियर संवाददाता-राजनांदगांव
जिला शिक्षा विभाग ने लाखों के फर्नीचर की खरीदी की है। इस खरीदी में भी बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है। आरोप लग रहे हैं कि डीईओ मैदानी अमले पर दबाव बनाकर फर्नीचर का भुगतान करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका प्रमाण है वह आदेश जिसमें उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को संकुल समन्वयकों से भुगतान हेतु चेक देने व उपयोगिता प्रमाण पत्र लेने के निर्देश जारी किए हैं। यह दबाव इसलिए क्यूंकि खरीदी से पहले न ही संकुलों से मांग पत्र मंगवाया गया और न ही उन्हें जानकारी दी गई। इस स्थिति में संकुल समन्वयक भुगतान करने से बच रहे हैं।
अब इस मामले में डीईओ हेतराम सोम ने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने सीधे तौर पर सभी आपत्तियों को निराधार करार दिया है। उनका कहना है कि जिस ग्रांट के तहत खरीदी की गई है उसके लिए न ही क्रय समिति की आवश्यकता है और न ही मांग पत्र की। विभाग से ऐसे निर्देश मिले ही नहीं है। उन्होंने सांसद और जिला पंचायत उपाध्यक्ष की आपत्तियों को भी निराधार बताया है।
उधर, डीईओ के आदेश के चलते विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और संकुल समन्वयकों में ऊहापोह की स्थिति है। दरअसल, जिस तरह खरीदी की गई है वो पूर्णत: नियम विरुद्ध बताई जा रही है। इस स्थिति में भुगतान करने पर संकुल समन्वयक भी इस मामले में फंस सकते हैं। बावजूद इसके दबाव बनने के चलते कुछ संकुलों से भुगतान कर दिए जाने की भी खबर सामने आ रही है लेकिन इन संकुलों ने भी फर्नीचर को लेकर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है।
अंबागढ़ चौकी बीईओ एआर देवांगन ने डीईओ के आदेश के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि, जिला कार्यालय से आदेश आया है। इसमें संकुल समन्वयकों से भुगतान करवाने और प्रमाण पत्र जारी करने का उल्लेख है। दूसरी ओर बीआरसी श्री मरकाम ने बताया कि विकासखंड कार्यालय अंबागढ़ चौकी के अंतर्गत आने वाले 14 संकुलों से भुगतान जारी कर दिया गया है। लेकिन इसके लिए न ही पहले मांग पत्र लिया गया था और अब नही कोई और प्रमाण पत्र दिया गया है।
डीईओ हेतराम सोम द्वारा जारी आदेश के बाद संकुल समन्वयकों विभाग के इस रवैये खिलाफत में उतरने की तैयारियां कर रहे हैं। कई संकुल समन्वयक फर्नीचर खरीदी का भुगतान करने राजी नहीं है। उनका कहना है कि न ही उनसे कोई मांग पत्र मांगा गया था और न ही इस खरीदी की जानकारी ही उन्हें थी। तो दूसरी ओर, खरीदी को लेकर शिकायतों का सिलसिला भी जारी है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और अब संचालक से शिकायत की गई है।
इन मुद्दों पर लगाई जा रही आपत्ति
मांग पत्र भी नहीं लिया : फर्नीचर खरीदी की सभी प्रकियाओं में सबसे पहले संकुलों से मांग पत्र लिया जाना था। जिले में 151 संकुल हैं। सभी को फर्नीचर खरीदी के लिए 80 हजार की ग्रांट मिली है। बगैर मांग पत्र के ही शिक्षा विभाग ने खरीदी को अंजाम दे दिया।
नहीं बनाई क्रय समिति : फर्नीचर खरीदी के लिए जिला शिक्षा अधिकारी ने क्रय समिति का गठन नहीं किया। यह समिति ही मूल्य और गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदार होती है।
निविदा का प्रकाशन नहीं – आश्चर्यजनक रुप से फर्नीचर खरीदी के लिए निविदा का प्रकाशन नहीं किया गया। इसके बाद चहेती फर्म को फर्नीचर सप्लाई का काम दे दिया गया वो भी सीएसआईडीसी द्वारा निर्धारित अधिकतम दर पर। जबकि निविदा प्रकाशित होने पर यह दर कम भी हो सकती थी।
अनावश्यक फर्नीचर खरीदे : संकुलों से जानकारी निकलकर सामने आ रही है कि विभाग द्वारा अनावश्यक फर्नीचरों की खरीद की गई है। इसी तरह फर्नीचर की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें हैं जिसके चलते उपयोगिता प्रमाण पत्र देने से संकुल समन्वयक हिचक रहे हैं।
सीधी बात
स्कूल नहीं संकुल स्त्रोत केंद्र के लिए खरीदे हैं फर्नीचर : डीईओ
संवाददाता – क्रय समिति नहीं बनाई गई, मांग पत्र भी नहीं लिया गया
डीईओ – शासन का जो निर्देश है उसके तहत ही खरीदी हुई है। जो पत्र प्राप्त हुआ है उसमें कहीं भी मांग पत्र लिए जाने का उल्लेख नहीं है और न ही क्रय समिति के गठन का निर्देश नहीं है। जो फर्म अधिकृत हैं उन्हीं से सीएसआईडीसी की दर पर ही खरीदी के निर्देश हैं। उसमें टेंडर जारी करने का कोई आदेश नहीं है।
संवाददाता – क्रय समिति तो एक विभागीय प्रक्रिया है
डीईओ – इस ग्रांट के लिए क्रय समिति का प्रावधान है ही नहीं। 50 फर्म रजिस्टर्ड हैं सभी एक ही दर में फर्नीचर दे रहे हैं। वे किसी प्रकार से एक पैसा कम – ज्यादा नहीं कर सकते। सीआईडीसी शासन का एक अधिकृत विभाग है। इसलिए इसमें टेंडर मंगाने की आवश्यकता होती ही नहीं है। ये फर्नीचर स्कूलों के लिए है ही नहीं, ये संकुल स्त्रोत केंद्र के लिए हैं। इसमें टेबल, आलमारी व अन्य फर्नीचर शामिल हैं।
संववादाता – जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने मांग पत्र लेकर ही फर्नीचर खरीदी की बात कही थी।
डीईओ – ऐसे ग्रांट के लिए मांग पत्र की जरुरत नहीं होती। मांगपत्र सिर्फ स्कूलों की आवश्यकताओं के लिए होती है। ये पहली बार सप्लाई हुआ है। उसके लिए कौन सा मांग पत्र।
संवाददाता – सांसद भी इस मामले को लेकर आशंका जता रहे हैं।
डीईओ – सांसद की ओर से कोई आपत्ति नहीं है। उन्हें मैंने लिखित में जानकारी दी है।
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