May 9, 2026

सीएम भूपेश के ऐतेहासिक फैसले को अवसर बनाना जिला शिक्षा अधिकारी को पड़ा महंगा

बालोद

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ऐतेहासिक फैसले को अवसर बनाना बालोद जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य 2 लोगों को महंगा पड़ गया है। अनुकंपा नियुक्ति में रिश्वत लेने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सहित जिला शिक्षा विभाग में पदस्थ लेखापाल और एक शिक्षक निलंबित कर दिए गए हैं। निलंबन का आदेश जारी होते ही शिक्षा विभाग में हड़कम्प मचा हुआ है। वही अब निलबंन अवधि के दौरान उक्त तीनों का मुख्यालय संभागीय सयुंक्त संचालक शिक्षा दुर्ग में नियत रहेगा। तो वही उक्त तीनों को जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी। आपको बता दे कि अनुकंपा नियुक्ति का निर्णय भूपेश सरकार का ऐतेहासिक फैसला है। उसी ऐतेहासिक निर्णय में रिश्वत लेने के मामले को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लेते हुए निलंबित किया है। गौरतलब हो कि अनुकंपा नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रावधानित 10 प्रतिशक पदों के सीमा बंधन में शिथिलीकरण किया गया है। सेवाकाल के दौरान शासकीय सेवकों का असामयिक निधन होने पर परिवार के आश्रित सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति देने के संबंध में सरकार ने पुनरीक्षित निर्देश जारी किया है। इसमें सीधी भर्ती के तृतीय श्रेणी के पद पर संवर्ग में स्वीकृत कुल पदों के 10 प्रतिशत के सीमा बंधन को खत्म कर दिया गया है। राज्य सरकार का यह फैसला ऐतेहासिक हैं। जिसकी सराहना प्रदेश के सभी लोगो ने की हैं।

भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप की स्तिथि
सूबे के मुखिया भूपेश बघेल के अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्णय में रिश्वत लेने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर, जिला शिक्षा विभाग में पदस्थ लेखापाल महेंद्र कुमार चन्द्राकर और डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम भरदा स्तिथ शासकीय माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक जितेंद्र देशमुख को निलंबित कर दिया गया हैं। निलबंन का आदेश मंगलवार की देर शाम स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया हैं। दरअसल तरुणा बेलचंदन ने सहायक ग्रेड-3 के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति हेतु जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर, लेखापाल महेंद्र कुमार चन्द्राकर और शिक्षक जितेंद्र देशमुख द्वारा 35 हजार अवैधानिक परितोषण प्राप्त करने की शिकायत पर प्रारम्भिक जांच में प्रमाणित पाए गए है। जो कि लोक सेवकों के कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) 1965 के नियम-3 के विपरीत गंभीर कदाचार है। जिसे गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ लेखापाल महेन्द्र कुमार चन्द्राकर एवं डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम भरदा के पूर्व माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक जितेंद्र देशमुख को छग सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम-1966 के नियम-9(1)(क) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में आरएल ठाकुर का मुख्यालय लोक शिक्षण संचालनालय, महेन्द्र कुमार चन्द्राकर एवं जितेन्द्र देशमुख का मुख्यालय दुर्ग स्तिथ संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) नियत रहेगा तथा निलंबन अवधि में उक्त निलंबित लोक सेवकों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। उक्त निलंबन के आदेश से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप की स्तिथि बनी हुई हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश ने दिए थे जांच के आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा महिला से रिश्वत लेकर अनुकंपा नियुक्ति की बात महिला के पिता को हुई। जिसके बाद महिला के पिता ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखित तौर पर की। जिसके जवाब मे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सम्बन्धित अधिकारी को जाँच के आदेश दिए थे।

जिसके बाद संयुक्त संचनालय शिक्षा विभाग द्वारा इसकी जांच की गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी समेत अन्य 2 आरोपियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया हैं।

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