May 11, 2026

हाथ पर हाथ धरे बैठे जिम्मेदारों के नाक के नीचे चल रहे झोलाझाप डॉक्टरों के दवाखाने

खैरागढ़ में लापरवाही के चलते हुई युवक की मौत के बाद भी नहीं जागा अमला

पायनियर संवाददाता-राजनांदगांव

झोलझाप डॉक्टरों की लापरवाही से खैरागढ़ में हुई युवक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधी प्रशासन की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिला मुख्यालय के आसपास ही ऐसे कई मामले हैं जिन पर औपचारिक कार्रवाई के बाद विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। वहीं कई स्थानों पर विभाग की नाक के नीचे धड़ल्ले से अवैध दवाखाने चलाएं जा रहे हैं। खैरागढ़ में घटी घटना से साबित होता है कि झोलाझाप डॉक्टर न सिर्फ मनमानी दवाईयां मरीज़ों को दे रहे हैं बल्कि वे सर्जरी कर मरीजों की जान खतरे में भी डाल रहे हैं।
खैरागढ़ के मामले से पहले खाद्य एवं औषधी प्रशासन सहित स्वास्थ्य महकमे की एक संयुक्त टीम ने घुमका क्षेत्र के भरदाखुर्द में एक निजी चिकित्सक के दवाखाने में छापेमारी की थी। इस मामले को महिनों बीतने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी। अलबत्ता भरदाखुर्द में जिस परस राम वर्मा के क्लिनिक में छापा मारा गया था वहां से कई प्रतिबंधित दवाईयों के पाऊडर का सैंपल भी बरामद किया गया था। खुलासा हुआ था कि उक्त चिकित्सक दवाईयों को पीस कर चूर्ण बनाकर लोगों को देता रहा। वे इसे आयुर्वेदिक दवाई बताता रहा।
इस छापामार कार्रवाई के बाद ड्रग कंट्रोलर की ओर से आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। वर्मा के खिलाफ कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई गई। स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मामले से खुद को अब तक दूर ही रखा है। अलबत्ता खबर है कि खाद्य एवं औषधी विभाग से मिल रहे सहयोग के बूते वर्मा को ही लीज के लाईसेंस पर मेडिकल स्टोर खोलने देने की जद्दोजहद जारी है। दूसरी ओर खबर है कि वर्मा अब भी धड़ल्ले से दवाईयों का हेर-फेर कर रहा है और उसे संरक्षण भी मिल रहा है।
हाइकोर्ट की सख्त चेतावनी के बाद भी इलाके में झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानदारी बन्द नहीं हो पायी है। इन अपंजीकृत अवैध चिकित्सकों के गलत इलाज से कई मरीजों की जान जा रही है और कई मरणासन्न हालत में पहुंच गए हैं तो अधिकांश मरीजों को स्थायी तौर पर जीवन भर के लिए नि:शक्त होना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के ढिलाई से झोलाछाप क्लिनिक बेधड़क संचालित हो रहे हैं। झोलाछाप डॉक्टर की इसी तरह की करतूत के चलते दो दिन पूर्व खैरागढ़ में बवासीर के गलत इलाज और प्रतिबंधित एच1 ड्रग के उपयोग से एक युवक की मौत हो गई। जबकि पूर्व में बीते साल क्षेत्र के मासूल और सलोनी में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से एक महिला समेत कई मरीजों की हालत बुरी तरह बिगड़ गई थी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते दोनो अवैध डॉक्टरों पर कोई भी कार्यवाही नहीं हो पायी।

सूची तैयार, कार्रवाई नहीं

खबरों के अनुसार गोपालपुर, गिधवा, मुड़पार, उपरवाह, हरडुवा, कलेवा, खैरा, पटेवा और घुमका में झोलाछाप अवैध क्लिनिक का खुलेआम संचालन हो रहा है। कोविड प्रोटोकाल को ताक पर रखकर बगैर किसी सावधानी के भीड़भाड़ में ही इलाज गम्भीर खतरे की आशंका को दरकिनार कर चल रहे झोलाछाप डॉक्टरों के कारोबार को स्वास्थ्य विभाग की खुली छूट समझा जा रहा है। जबकि हाइकोर्ट के फटकार के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों की सूची भी तैयार कर रखी है परंतु अभी तक कार्यवाही नही हो पायी है।

अस्पताल के बाजू अवैध दवाखाना

पूरे विभाग की जानकारी में समीपस्थ भरदाखुर्द में रोजाना हजारों रुपये का अवैध कारोबार कर रहे कथित आयुर्वेद चिकित्सक के खिलाफ कार्यवाही के बजाय छूट देने का आरोप भी विभाग पर लग चुका है। घुमका में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चारदीवारी के करीब ही लम्बे समय से एक झोलाछाप डॉक्टर का कारोबार तमाम स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने खुलेआम संचालन पर भी कार्यवाही तक नही हो पायी है। तब अंदरूनी ग्रामीण अंचलों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

प्रतिबंधित एच1 ड्रग का हो रहा इस्तेमाल

खैरा, कलेवा में भी इसी तरह से खुलकर अवैध क्लिनिक का संचालन हो रहा है जबकि कलेवा और खैरा में स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता ही अवैध क्लिनिक संचालित कर रहे हैं। वहीं घुमका के झोलाछाप डॉक्टर के नजदीकी रिश्तेदार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ होने से विभाग के अधिकारी भी कार्यवाही से हाथ खींच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में बेध?क अवैध क्लीनिक में प्रतिबंधित एच1 ड्रग का उपयोग किया जा रहा है। इस तरह के गलत इलाज और दवाइयों से मरीजों की मौत हो रही है। इसके बावजूद औषधि प्रशासन विभाग की कार्यवाही नही होने को लेकर मोटे लेनदेन की आशंका जताई जा रही है। जबकि क्षेत्र के अधिकांश झोलाछाप डॉक्टरों को मोटी रकम के बदले थोक में ड्रग लाइसेंस भी दिया गया है और जिससे इस तरह के अवैध कारोबार को रोकना मुश्किल दिख रहा है।

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