निगम आयुक्त के निरीक्षण में खुली पोल, शहर में पसरी गंदगी को लेकर हुए नाराज
राजनांदगांव@thethinkmedia.com
शहर में सफाई ठेकों की कलई खुलने लगी है। सोमवार को निरीक्षण में निकले निगम आयुक्त आशुतोष चतुवेर्दी ने मोतीपुर वार्ड नं 7 में सफाई ठेका संभाल रहे ठेकेदार अध्यक्ष सरस्वती सेवा मंडल को वार्ड में सफाई का अभाव, सार्वजनिक स्थल में कचरा संग्रहित होने पर दो दिवस के भीतर सफाई कार्य में सुधार करने नोटिस जारी किया है। दैनिक पायनियर ने शहर में सफाई के बिगड़ते हालात और सफाई ठेकों की आड़ में चल रही मनमानियों को लेकर पहले भी खबर प्रकाशित की थी और अब यह तस्वीर और साफ हो चुकी है।
शहर के 27 वार्डों में सफाई व्यवस्था ठेकेदारों के जिम्मे हैं। इनमें से 17 वार्ड कांग्रेसी पार्षदों के हैं। सफाई ठेकों को लेकर भी निगम के भीतर खींचतान चलती रहती है जो कि हैरान करने वाली बात है। महिला समूह की आड़ में कई पार्षद सफाई का ठेका हासिल कर लेते हैं और इस एवज में उन्हें बड़ा मुनाफा होता है। सिर्फ इस सफाई ठेके के लिए ही हर महिने निगम को 30 लाख रुपए का भुगतान करना होता है। औसतन हर वार्ड में एक लाख रुपए से ज्यादा की रकम खर्च की जाती है।
सफाई ठेकेदार को वार्ड में कम से कम 10 सफाई कर्मियों की नियुक्ति करनी होती है ताकि वार्ड में सफाई व्यवस्था बेहतर हो सके। ठेके की आड़ में खेल यहीं शुरु होता है। महिला समूहों की आड़ में ठेका पार्षद हथिया लेते हैं। इस एवज में समूहों को कुछ मामूली रकम मिल जाती है। वहीं सफाई कर्मियों की तादाद कभी भी 10 नहीं होती। 5-6 कर्मी ही सफाई करते हैं। कई सफाई कर्मियों के नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ रजिस्टर में दर्ज होते हैं पर उन्हें काम पर नहीं रखा जाता है। इसके एवज में बचने वाली रकम सीधे पार्षदों के जेब में चली जाती है।
बगैर सूचना निरस्त हुआ था ठेका
सफाई ठेकों को लेकर हालही में कुछ भाजपा पार्षदों ने सवाल भी उठाए थे। बजट बैठक के दौरान भाजपा की महिला पार्षद ने आरोप लगाया था कि पार्षदों को बगैर जानकारी दिए उनके वार्डों के सफाई ठेके निरस्त कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा पार्षदों के वार्ड के ठेके निरस्त कर कांग्रेसी पार्षदों के वार्ड में सफाई ठेके दिए गए हैं। उन्होंने वार्डों में सफाई का मसला भी उठाया था। वहीं पार्षद अजय छैदेया ने अपने वार्ड में सफाई कर्मियों का अभाव और बदहाल सफाई व्यवस्था को भी सामने रखा था।
सफाई ठेके के लिए बनती है रिंग
निगम के भीतर सफाई ठेके को लेकर खींचतान और इनमें मनमानियों का ये पहला मामला नहीं है। कई अरसे से सफाई ठेके चल रहे हैं और हर बार यह पार्षदों के ही हाथों में चले जाते हैं। निगम में पक्ष-विपक्ष की राजनीतिक तकरार काफी तल्ख होती है बावजूद सफाई ठेके के मामले में दोनों पक्ष मिलकर रिंग बनाकर यह काम करते हैं। हालांकि इसमें सभी शामिल नहीं होते। यही कारण होता है कि सफाई ठेकों को लेकर निगम में जिम्मेदार सवाल नहीं करते या कतराते हैं और जो सवाल दागते हैं उन्हें माकूल जवाब नहीं मिलता।
सफाई पर फूंक दिए जाते हैं तकरीबन 8 करोड़ 40 लाख
हर महिने नगर पालिक निगम 70 लाख रुपए सफाई के लिए खर्च कर रहा है। साल में यह तकरीबन 8 करोड़ 40 लाख होते हैं। बावजूद सफाई व्यवस्था चौपट है। यह आज की स्थिति तो है ही पूर्व में भी निगम में सत्ता संभाल चुके लोगों ने इस मामले में कुछ खास नहीं किया है। स्वच्छता रेटिंग में भी शहर को कोई खास उपलब्धि इसलिए ही नहीं मिल पाती। करोड़ों के खर्च के बावजूद अगर स्थिति नहीं सुधर रही है तो तय है कि इसमें कई खामियां हैं जिन्हें दूर करने की जहमत कोई नहीं उठा पा रहा या फिर इसमें सुधार से कईयों को नुकसान उठाना पड़ सकता है इसलिए भी हालात जस के तस हैं।
27 वार्डों में ठेका और 285 कर्मचारी
वार्ड नं. 01, 04, 06, 07, 08, 10, 13, 15, 16, 17, 18, 19, 22, 23, 24, 26, 32, 33, 35, 36, 39, 40, 42, 44, 46, 48 और 51 में सफाई ठेकेदारों के भरोसे है। वार्ड नं. 26 में रात्रिकालिन सफाई की व्यवस्था की गई है क्यूंकि यह बाजार का इलाका है। इसके अलावा वार्ड नं 21 और 34 में वार्ड के आधे हिस्से में सफाई ठेकेदारों के जिम्मे बताई जाती है। इनमें से 17 वार्ड के पार्षद कांग्रेसी ही हैं। इससे पहले यह तस्वीर कुछ और ही थी। इन वार्डों में ठेकेदारों को प्रत्येक माह 30 लाख रुपए आबंटित होते हैं। वहीं निगम में 285 सफाई कर्मी हैं। इनमें से 170 कर्मचारी नियमित हैं। 115 कर्मचारी प्लेसमेंट के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। इन्हें प्रत्येक माह 40 लाख रुपए का वेतन बांटा जाता है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के काम में भी 400 से अधिक स्वच्छता दीदीयां लगी हुई हैं।

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