कार्रवाई के नाम पर होती है सिर्फ खानापूर्ति, संरक्षण पर फल-फूल रहा कारोबार
जशपुरनगर@thethinkmedia.com
नए एसपी विजय अग्रवाल के चार्ज लेने के बाद से ही नशा के अवैध कारोबारियों पर नकेल कसी जा रही है। पड़ोसी राज्यों से शराब और गांजा की तस्करी कर छत्तीसगढ़ लाकर खपाने वाले कोचियों और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इन सब के बीच एसपी विजय अग्रवाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती जिला मुख्यालय में होने शराब के अवैध कारोबार पर नकेल कसने की है। एसपी की कार्रवाई के बाद जिला मुख्यालय में हो रहे देशी शराब के अवैध कारोबार की पायनियर के द्वारा पड़ताल की गई जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने निकलकर आए हैं। जिला मुख्यालय के हृदय स्थल बस स्टैण्ड की रक्षित गली में सबसे अधिक देशी शराब की बिक्री की जाती है। इसके बाद गढ़ाटोली, सरनाटोली और डीपाटोली में महुआ से बने देशी शराब का अवैध कारोबार बड़े पैमाने में किया जा रहा है। इन चार बस्तियों में रहने वाले शराब के कारोबार से परेशान व्यक्तियों ने नाम न छापने के शर्त में बताया कि हर मोहल्ले में कम से कम ५० लोगों के द्वारा शराब बनाकर बिक्री की जा रही है। औसतन इन चार मोहल्लों में महीने में ८० लाख से १ करोड़ रुपए के बीच का कारोबार किया जाता है।
कार्रवाई पर होती है खानापूर्ति
पुलिस के द्वारा इन मोहल्लो में नियमित कोई बड़ी कार्रवाई अबतक नहीं की गई है। सालाना छूटपूट खानापूर्ति की कार्रवाई की जाती है जिसके बाद अवैध शराब का कारोबार फिर से पनपने लगता है। अवैध शराब कारोबारियों की पौ इतनी बारह हो गई है कि उनके मोहल्ले के सज्जन व्यक्ति भी उनकी शिकायत नहीं कर सकते। शिकायत करने पर मारपीट की नौबत तक आ जाती है।
हर मोहल्ले में 50 विक्रेता
बस्तियों के भीतर अवैध महुआ शराब की बिक्री करने वालों और पीकर बस्ती का माहौल खराब करने वालों से परेशान सज्जन लोगों ने पायनियर से चर्चा करते हुए बताया कि एक परिवार के भीतर ४ युवक होने पर चारों के द्वारा शराब बनाई जाती है और बिक्री की जाती है। इस प्रकार एक मोहल्ले में ५० लोगों के द्वारा शराब बनाने और बेचने का कार्य किया जाता है। जिले के चार प्रमुख नामचीन बस्तियों में लगभग २०० लोगों के द्वारा रोजाना १ से २ हजार रुपए की शराब की औसतन बिक्री की जाती है। कुछ लोगों के द्वारा ५ से १० हजार रुपए की बिक्री रोजाना की जाती है। २०० लोगों के द्वारा औसतन आंकड़े में प्रतिदिन २ हजार रुपए की बिक्री कर ४ लाख का शराब बेचा जाता है और एक महीने यानि ३० दिनों में १ करोड़ से भी अधिक १ करोड़ २० लाख रुपए की शराब की बिक्री की जाती है।
पुलिस में होते हैं मुखबिर
अमूमन पुलिस अपराधियों पर निगरानी रखने के अपने मुखबिर रखती है कुछ वैसे ही मुखबिर शराब कारोबारी पुलिस डिपार्टमेंट में अपने रखते हैं। जब पुलिस की टीम कार्रवाई के लिए उनकी बस्तियों में जाने की तैयारी करती है उसी दौरान शराब कारोबारियों के मुखबिर के द्वारा उन्हें सूचना दे दी जाती है और वे अपने सामान और शराब को ठिकाने लगा देते हैं।
- शिकायत मिलने पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। तहसीलदार और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई की जा चुकी है। पेट्रोलिंग बढ़ाकर फिर से कार्रवाई की जाएगी। -आरएस परिहार, एसडीओपी जशपुर

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