January 30, 2026

सप्लाई चैन टूटने का खतरा

भाटापारा@thethinkmedia.com

क्यों दलहन की फसल लें ? प्रोसेसिंग से उद्योगों ने बनाई दूरी। दलहन की पहुंच बाजार तक कैसे सुनिश्चित की जा सकेगी। अंत में उपभोक्ता दलहन की खरीदी, सीमित मात्रा में करके लौटता हुआ दिखाई दे सकता है। यह सब आने वाले दिनों में देखे जाएंगे, क्योंकि दलहन की स्टॉक लिमिट तय की जा चुकी है।
दलहन की बेलगाम होती कीमतों पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम के तहत अब दलहन मिलों और खुदरा कारोबारियों के साथ स्टॉकिस्टों को स्टॉक लिमिट के भीतर रहकर न केवल कारोबार करना होगा बल्कि रोजाना इसकी जानकारी संबंधित विभाग को देनी होगी। फरमान का पालन किया जाना चालू हो चुका है लेकिन जैसी प्रारंभिक दिक्कत आ रही है वह, दुष्परिणाम का संकेत दे रही है। इसे देखते हुए विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
किसान होगा परेशान : स्टॉक लिमिट तय किए जाने का पहला असर उस किसान पर होगा जिसने मेहनत से दलहन की फसल ली हुई होगी। मंडियों में अपनी उपज को लेकर पहुंचा किसान उस वक्त हताश होता दिखाई देगा जब कीमत अच्छी नहीं मिलेगी। यह इसलिए होगा क्योंकि निर्धारित से ज्यादा मात्रा में भंडारण की छूट नहीं मिली है। इसलिए उतनी ही उपज खरीदी जाएगी जो भंडारण क्षमता को पूरी करती है। जाहिर है भाव गिरेंगे।
यूनिटें बनाएंगी दूरी : सीजन को ध्यान में रखकर काम करने वाली यूनिटों को नए नियम के पालन के लिए स्टॉक सीमा के भीतर रहकर उत्पादन करना होगा। इससे कच्चे माल की भंडारण क्षमता प्रभावित होगी। मात्रा ज्यादा हुई तो स्टॉक लिमिट के भीतर आने के लिए औने-पौने दाम में प्रोसेस किए उत्पादन की बिक्री करनी होगी। समस्या तब और ज्यादा गहराएगी जब पूंजीगत दिक्कतें सामने आएंगी। यह कमजोर टर्नओवर और बैंक लिमिट में बाधा के रूप में सामने आ सकती है।
स्टॉकिस्ट भी होंगे पीड़ित : दलहन प्रोसेसिंग यूनिट व बाजार के बीच मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाकर चलने वाला स्टॉकिस्ट भी नई नीति से पीड़ित होगा। पूरे साल की मांग के लिए यह क्षेत्र भी स्टॉक लिमिट जैसी शर्त से पीड़ित होने जा रहा है क्योंकि सप्लाई चैन की यह मजबूत कड़ी अब स्टॉक करने से बचता दिखाई दे रहा है। बता दें कि तेजी और मंदी जैसी स्थितियों से यही क्षेत्र सबसे पहले प्रभावित होता है।
उपभोक्ता को लगातार झटके : दलहन की फसल लेने में किसानों की अरुचि। मंडियों में स्टॉकिस्ट की कमजोर खरीदी। मिलों में संचालन के घंटे कम होना। होलसेल मार्केट में अनिश्चितता। हताश रिटेल मार्केट। अंत में वह उपभोक्ता जो पूरे साल तेजी के झटके को सहन करने पर मजबूर है। सप्लाई चैन की यह अंतिम कड़ी फिर से अनिश्चितता के भंवर जाल में फंसी दिखाई देगी क्योंकि इसके पास विकल्प नहीं हैं।

  • नया नियम सुगम कारोबार को बाधित करने वाला है। इससे हर वर्ग परेशान और हताश होगा। दलहन मिलें वैसे भी संकट के दौर से गुजर रहीं हैं। ऐसी स्थिति में आग्रह है कि इस पर व्यावहारिक दृष्टि से फैसले लिए जाएं ताकि किसान, स्टॉकिस्ट, प्रोसेसर, बाजार और उपभोक्ता को राहत मिले।
    -नरेश आर्य, अध्यक्ष, दाल मिल एसोसिएशन, भाटापारा
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