नई दिल्ली @cgpioneer.in
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पहली कैबिनेट बैठक संपन्न हो गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रही इस बैठक में किसानों को फायदा पहुंचाने का फैसला किया गया। बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि कैबिनेट ने फैसला लिया है कि मंडियों के जरिए किसानों तक एक लाख करोड़ रुपये पहुंचाए जाएंगे। तोमर ने बताया कि किसान समूहों को दो करोड़ रुपये का ऋण मिलेगा। मंडियां इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड का इस्तेमाल कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि फैसला लिया गया है कि एक लाख करोड़ रुपये के फंड का इस्तेमाल एपीएमसी कर सकेंगी। एपीएमसी मंडियों को और मजबूत किया जाएगा। कृषि मंडियों को और संसाधन प्रदान किए जाएंगे। हेल्थ इमरजेंसी के लिए 23 हजार करोड़ का पैकेज- कृषि मंत्री तोमर ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसानों के हित के लिए केंद्र सरकार ने जो कहा है वह कर रही है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हेल्थ इमरजेंसी (स्वास्थ्य आपातकाल) के लिए 23 हजार करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दे दी।
नारियल विकास बोर्ड में होगी सीईओ की नियुक्ति- वहीं, फैसला लिया गया कि नारियल विकास बोर्ड में अब सीईओ की नियुक्ति होगी। कृषि मंत्री ने कहा कि नारियल की खेती को बढ़ाने के लिए हम कोकोनट बोर्ड एक्ट में संशोधन कर रहे हैं। अब कोकोनट बोर्ड का अध्यक्ष एक गैर-अधिकारी व्यक्ति होगा। वह किसान समुदाय से होगा, जिसे इस काम के बारे में अच्छी जानकारी और समझ होगी।
अब छत्तीसगढ़ में कोदो, कुटकी, रागी के उत्पादन को दिया जाएगा बढ़ावा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश-विदेश में कोदो, कुटकी, रागी जैसे मिलेट की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रदेश में मिशन मोड में मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में बड़े क्षेत्र में मिलेट का उत्पादन होता है। मिलेट्स के संग्रहण, प्रसंस्करण और वेल्यू एडिशन से किसानों, महिला समूहों और युवाओं के लिए रोजगार के साथ अच्छी आय के साधन विकसित किए
जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वन विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोदो, कुटकी और रागी के क्षेत्र तथा उत्पादन में वृद्धि कर प्रसंस्करण के माध्यम से विभिन्न उत्पाद तैयार कर प्रदेश में मिलेट्स की खपत को बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा सहित राजनांदगांव, कवर्धा और बेमेतरा तथा सरगुजा के कुछ क्षेत्रों में इनका उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि मिलेट्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए चुनिंदा विकासखण्डों में मिलेट क्लस्टर चिन्हांकित कर उन्नत खेती को बढ़ावा दिया जाए। मिलेट्स की खेती से महिला स्व सहायता समूहों को जोड़ा जाए। उन्होंने गढ़कलेवा के व्यंजनों में कोदो, कुटकी और रागी से तैयार व्यंजनों को शामिल करने कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिलेट्स के साथ मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उत्पादन वाले गांवों में छोटी-छोटी प्रसंस्करण इकाईयां लगाई जाएं और हाईजिन का ध्यान में रखते हुए एक या दो केन्द्रों में इनके पैकेजिंग की इकाईयां स्थापित की जाएं। प्रदेश में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए इनकी खेती और फसल कटाई के लिए मशीनरी किराए पर उपलब्ध कराने, स्थानीय एवं उन्नत किस्म के बीजों की आपूर्ति, कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से इनके उत्पादन में वृद्धि के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोदो, कुटकी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करने का राज्य सरकार ने निर्णय लिया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना में भी इसे शामिल किया गया है। कोदो, कुटकी और रागी के उत्पादन वाले क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने के लिए कोदो की खिचड़ी और रागी का हलवा दिया जा रहा है। इसके अलावा रागी लड्डू, कोदो, कुटकी मुरकु, पोहा जैसे उत्पाद भी इससे तैयार किए जा सकते हैं, जिनका उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों और मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा मिलेट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च हैदराबाद से सहयोग लेने की पहल की जा रही है। बैठक में जानकारी दी गई कि लघु वनोपजों के संग्रहण और प्रसंस्करण का काम कर रहे महिला स्व सहायता समूहों को पिछले दो वर्षों में इससे 501 करोड़ रूपए की अतिरिक्त आय हुई है। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़कर 52 हो गई है। इसी तरह संग्राहकों की संख्या डेढ़ लाख से बढ़कर 6 लाख से अधिक हो गई है। हर्बल उत्पादों के प्रसंस्करण में 115 गुनी वृद्धि हुई है। वर्ष 2018 में 5400 क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण होता था, जो वर्ष 2021 में बढ़कर 6 लाख 21 हजार 176 क्विंटल हो गया है। हर्बल उत्पादों का विक्रय भी दोगुना हो गया है।
खाद-बीज की किल्लत को लेकर भाजपा ने किया चक्काजाम
अंतागढ़। प्रदेश में खाद और बीज की किल्लत को लेकर हंगामा शुरू हो गया है। अंबिकापुर में प्रदर्शन के बाद अब कांकेर जिले में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। यहां पूर्व भाजपा विधायक भोजराज नाग के नेतृत्व में अंतागढ़ के ग्राम बोंदानार में ग्रामीणों ने चक्का जाम किया।
छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर राज्य सरकार केंद्र पर कम मात्रा में खाद उपलब्ध करने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी और पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के मुखिया रहे डॉ रमन सिंह आरोप लगा रहे हैं कि राज्य सरकार गलत आंकड़े पेश करते हुए खाद की कालाबाजारी को बढ़ावा दे रही है। सच क्या है यह तो दोनों सरकारें जानती हैं, मगर एक सच यह भी है कि प्रदेश में खाद के साथ ही धान के बीज की किल्ल्त पडऩी शुरू हो गई है। दो दिन पूर्व ही अंबिकापुर जिले में खाद के लिए किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया। इधर बस्तर संभाग के अंतागढ़ इलाके में भाजपा के पूर्व विधायक भोजराज नाग ने खाद और बीज की कमी को लेकर हुहे चक्का जाम आंदोलन का नेतृत्व किया। इस चक्का जाम के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। लगभग एक घंटे तक चले चक्का जाम के दौरान इलाके के तहसीलदार और पुलिस अधिकारी ने मौके पर पहुँच कर समझाइश दी और जाम को खुलवाया। प्रशासन आश्वस्त किया है कि किसानों को उनकी जरुरत के मुताबिक खाद-बीज दिलवाने का प्रयास किया जायेगा।
राज्य सरकार ने जारी किया आंकड़ा, 54.55 प्रतिशत रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति
छत्तीसगढ़ राज्य को खरीफ सीजन 2021 के लिए अब तक भारत सरकार द्वारा आबंटित कोटे के विरूद्ध मात्र 54.55 फीसदी रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति उर्वरक निर्माता प्रदायक कम्पनियों द्वारा की गई है। राज्य को 6 जुलाई की स्थिति में 4 लाख 53 हजार 457 टन रासायनिक उर्वरक की प्राप्ति हुई है, जो कि आबंटित कोटे 8 लाख 31 हजार 343 टन का 54.55 प्रतिशत है। राज्य सहकारी विपणन संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 जुलाई तक की स्थिति में राज्य को 4 लाख 14 हजार 251 टन यूरिया के आबंटन के विरूद्ध मात्र 2 लाख 35 हजार 560 टन यूरिया की आपूर्ति हुई है, जो आबंटन कोटे का मात्र 56.86 प्रतिशत है। इसी प्रकार डीएपी उर्वरक 2 लाख 42 हजार 27 टन के विरूद्ध एक लाख 22 हजार 885 टन की आपूर्ति हुई है, जो आबंटन का 50.77 प्रतिशत है। एनपीएएस उर्वरक 90 हजार 582 टन के कोटे के विरूद्ध 49 हजार 556 टन तथा एमओपी उर्वरक 84 हजार 484 टन के विरूद्ध 45 हजार 756 टन प्राप्त हुआ है।

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