अंचल में शबाब पर कृषि कार्य, खाद की किल्लत बरकरार
डोंगरगांव नगर@thethinkmedia.com
नगर क्षेत्र सहित अंचल में कृषि कार्य अपने शबाब पर है। किसान अब कृषि कार्यों में व्यस्त हो गए हैं। कृषि सीजन का असर मार्केट में देखा जा सकता है। अंचल में सिंचाई सुविधाविहीन अधिकतर किसान धान की बुआई कर चुके हैं। औसत बारिश से कुछ वर्ग लाईचोपी में व्यस्त हैं। वहीं सिंचाई सुविधा संपन्न किसानों का थरहा पौधा भी रोपा के लिए क्यारी में तैयार है। रोपाई के लिए अब झमाझम का इंतजार है।
डोंगरगांव नगर व अंचल कृषि पर आधारित है। नब्बे फीसदी ग्रामीण कृषि पर ही आश्रित हैं। जून के दूसरे पखवाड़े में प्री मानसून की बारिश से ही किसानों के खेत सफाई व जुताई होकर अनुकूल बारिश व मौसम के लिए तैयार है। इस दरम्यान किसान खाद के लिए भी भटकते नजर आ रहे हैं। जानकारी मुताबिक अंचल के विभिन्न सहकारी समितियों से खाद को लेकर गतिरोध बनी हुई है। विदित हो कि अंचल के किसान राजनैतिक जनप्रतिनिधियों के अगुवाई में अनेक सोसायटी में प्रदर्शन भी कर चुके हैं। बहरहाल किसान जैसे तैसे कृषि केंद्रों से खाद उठाव कर सिर्फ झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों का मुख्य सिरदर्द है डीएपी
केंद्र सरकार से बमुश्किल सब्सिडी वहन करने डीएपी खाद की कीमत तो संभाल ली गई, लेकिन डीएपी की उपलब्धता पर राजनैतिक दलों की ओर से कमतर ही पहल किए जा रहे हैं। राज्य सरकार रोपाई के पूर्व डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की दिशा में जरूर नजर आती है। इधर जब तक डीएपी का रैक पहुंचेगा तब तक किसान कृषि केंद्रों में लुट चुके होंगे।
कृषि सीजन के मार्केट में उछाल
कृषि सीजन में किसान वर्ग भले ही खेत की ओर रुख किये हुए हैं, फिर भी मार्केट में छतरी, कवेलू के लिए सामग्री, बारिश से बचाव के टीन शेड जैसे सामग्री खरीदी के लिए मार्केट में उछाल बरकरार है। इस दरम्यान किसानवर्ग अच्छी बारिश की आस में भी नजर आते हैं। वैसे रोपाई शुरू होने के बाद से मार्केट में तीन माह तक मंदी भी छाए रहने के आसार हैं।
ट्रैक्टर, हल व मजदूर का टोटा
कृषि सीजन आते ही मजदूर का टोटा हो गया है। मार्केट में आसानी से मिलने वाले मजदूर अब अधिक मजदूरी पर भी आपके लिए आसानी से उपलब्ध नही हैं। एक समय रोपाई के आसार बनने से गांवों में रोपा के लिए मजदूर अब दूर की बात हो गई। हल वाले किसानों के भाव बढ़ चुके हैं। ट्रैक्टर तो सात से आठ सौ रूपये प्रति घंटे के दर से कार्य कर रहे हैं। कृषि कार्य अब डेड़ गुना महंगा हो चुका है।

More Stories
एस्सेल माइनिंग की दो कोयला खदानों को निष्पादित करने में भारत में इस वर्ष कोयले की कमी हो जाएगी
ओपी जिंदल विश्वविद्यालय में स्मार्ट इंडिया हैकथॉन-2023
युवाओं को दरकिनार करना लोकसभा चुनाव में भी पड़ सकता कांग्रेस पर भारी – अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)